तीसरी आँख वाले इंडिगो बच्चे – AJIT VADAKAYIL
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का वीडियो चला इस पोस्ट को पढ़ते हुए ।
इंडिगो
बच्चे की मानसिक सोच संरचना खड़ी/ रैखिक रूप में नहीं
, बल्कि पार्शव -- या होलोग्राफिक है ।
एक
इंडिगो बच्चे की आभा का रंग अँग्रेजी में इंडिगो indigo या नील के रंग की होती है । उनके 5
इंद्रियाँ दूसरों की तुलना में व्यापक
हैं । वे जीवित उदाहरण हैं
उन निष्क्रिय क्षमताओं के , जो प्राचीन वैदिक समय के भारतीय योगियों में थी ।
उनकी बोधगम्य क्षमताएँ का उपयोग, अब तक, , मस्तिष्क के निष्क्रिय क्षेत्र , आनुवंशिक परिवर्तन के कारण में । इस प्रकार की सोच उच्च बुद्धिमत्ता लाती है ।
इंडिगों के पास सहज चिकित्सा की क्षमता है , उनके बेहतरीन डीएनए पैटर्न की वजह से । इस डीएनए आकृति में 8 कुंडली , 12 खड़ी ( मोबियस का तार की तरह ) जो जैविक रूप से पैदा कर सकती और
फेंक सकती है स्केलर तरंगों को, जो
रेकी तरंगों के रूप में जानी जाती हैं, जो प्रकाश से तेजी से दोड़ती हैं किसी भी माध्यम में बिना ताकत
गवाये विज्ञान, को अभी पूर्ण आंकड़ा ढूँढना है डीएनए
अंकित तरीका या सीधा संबंध डीएनए और चेतना का ।
इंडिगो
बच्चों में कबाड़ डीएनए नहीं है । तेरे शरीर में 96% कबाड़ डीएनए
है ।
कुंडलित दोहरी लंबाई वाला डीएनए विकासवादी शारीरिक प्रक्रिया एक पीढ़ी से अगली करने तक याद रखने वाले ज़रिये से बहुत अधिक है -- ( एक नवजात बिल्ली का बच्चा भी टट्टी करने से पहले एक छेद, खोदता है )। यह एक ब्रह्मांड से संचार का उपग्रह है जो हजारों सदियों से निष्क्रिय है ।
इंडिगो
बच्चें माध्यम हैं , उच्च गामा मस्तिष्क तरंग gamma brain wave >40 हर्ट्ज hertz ( तरंग नापने की इकाई ) से ज्यादा , और बेहतरीन डीएनए संकेतन के साथ , उच्च संचार और दूर संवेदन telepathy के लिए ।
इंडिगो
या नील रंग “तीसरी
आँख चक्र” का रंग है । यह चक्र अतीन्द्रिए दृष्टि , या ऊर्जा, दर्शन
और आत्माओं को देखने की क्षमता को नियंत्रित
करता है ।
नीचे
से शरीर का छठा चक्र , तीसरी
आँख चक्र है । यह पिटीयूटरी ग्रंथि pitiutary
gland की सहायता करता है जिसके
हार्मोन अन्य ग्रंथियों और
मस्तिष्क को नियंत्रित करते हैं -- यह नील रंग के साथ प्रतिध्वनित -- - ज्ञान, अतीन्द्रिए दृष्टि, कल्पना को मजबूत करता है ।
वे
दुर्लभ क्षमताओं , उन्नत प्रतिभा और दूर संचारित/ मानसिक
क्षमताओं और अन्य असाधारण विशेषताएँ प्रदर्शित करते हैं ।
इंडिगो
बच्चे में जैविक, मानसिक, आध्यात्मिक
कौशल और क्षमता है, साधारण की तुलना में । इंडिगो गैर इंडिगो की तुलना में अपनी भावनाएं अलग तरह व्यक्त करते हैं
क्योंकि उनमें उच्च
आत्मसम्मान और मजबूत अखंडता है ।
वे
एक खुली किताब की तरह है कि आप को पढ़
सकते हैं और जल्दी से किसी भी छिपा एजेंडा या उन्हें हेरफेर करने के लिए सूक्ष्म प्रयास
को पता कर लेते हैं । बल्कि, वे
तेरा छिपा एजेंडा भी देख सकते
हैं जो तुम नहीं देख पाते !
उनमें रोजमर्रा
की संकीर्णता के लिए धैर्य नहीं है । यह बच्चे अत्यधिक
सहज ज्ञान युक्त है । वे सभी देख सकते हैं, और
एक ही बार में सब समझ जाते हैं ।
उनमें स्वाभाविक
रूप से मजबूत दृढ़ संकल्प होता है खुद
ही अपने तरीके से काम करते
हैं और केवल बाहर से मार्गदर्शन चाहते हैं यदि सम्मान के साथ और स्वतंत्र प्रारूप
से भेंट किया जाए तो ।
उन्हे खुद के लिए कार्य करने की
स्थितियां बनान पसंद है ।
वे तेजी से चीज़ें समझ जाते हैं बशर्त उन्हे विषय पसंद हो, जो उन्हे बहुत उन्नत बनाता है उनके विषय में । यह बच्चे तब सबसे अच्छा परिणाम देते हैं जब इन्हे एक वयस्क की तरह सम्मानित व्यवहार किया जाए।
मनोवैज्ञानिक
“धक्का बटन” समाज के द्वारा अक्सर उन्हें आवारा और रूढ़िविरोधी के रूप में चिह्नित कर देता है ।
वे
पाखंड से लड़ते हैं और ढांचे को नहीं पहचान पाते जो सामान्य है कमज़ोर दिमाग मनुष्यों के लिए ।
वे
वर्तमान सामाजिक वातावरण के भीतर खतरे में हैं । उनमें से कई , बुद्धिमती सपने देखने के कारण गलत लक्षणों में गिने जाते
हैं और अनुपयुक्त तरीके से पागलपन schizophrenia, द्वि-ध्रुवीय
विकार bi-polar disorder, आदि के केस बना दे
जाते हैं । चिकित्सा और मनोरोग समुदाये अभी तक लक्षण समझ नहीं
पाये हैं , कारण और उपचार
जैविक, अवधारणात्मक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक संवेदनशीलता की जो मानव आनुवंशिक उन्नति का कोड है ।
कुछ
इंडिगो बच्चे 1988 से
1997 में पृथ्वी पर पैदा हुए, जब शनि , यूरेनस
Uranus और नेपच्यून Neptune संयोजन में थे ।
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इंडिगो
बच्चे का सबसे आम लक्षण :
-- वे महसूस करते हैं और बेहतर काम
करते हैं और तब हैरान होते हैं जब दूसरे समझ नहीं पाते । वे जानते हैं वे कौन
हैं और यह बताने से डरते नहीं हैं..
-- वे मूर्ख और संपूर्ण अधिकार से नहीं भुगत
ते , बल्कि
वे चुनते हैं ।
-- वे दूसरों के पीछे नहीं
जाते --जैसे कतार
मैं खड़ा होना या
शून्य रचनात्मक विचार के अनुष्ठान
।
-- वे “प्रणाली ध्वस्त करने वाले हैं” क्योंकि वे रोज़मर्रा की बातें
सतही तरीके से देख सकते हैं । वे आंतरिक रूप से विद्रोही होते । वे दुनिया और व्यवस्था को बदलना चाहते हैं, और
पिटा हुआ रास्ता नहीं लेते ।
-- वे स्कूल में अलग रहते हैं क्योंकि वे अपने आसपास
बुद्धिमती नहीं देखते और और सीखने
के लिए रट्टा और रटने की परवाह नहीं करते । वे गुस्सैल हो जाते हैं जब
वे देखते हैं की कोई कपटी उन्हे देख रहा है और नचा रहा है । वे बेईमानी से नफरत है और यह समझ जाते हैं।
-- वे प्रमुख होना चाहता हैं—वे एक बेवकूफ टीम का हिस्सा नहीं होना चाहते, और
इसलिए अकेले काम करते हैं या खेलते हैं
। वे तैयार रहते है और अडिग योद्धा हैं जो ईमानदारी का अभाव मैं प्रणाली को काटते है।
-- उनमें मानसिक और आध्यात्मिक हित कम उम्र से है--और अपने अंतर्ज्ञान में विश्वास
है--और दानवीर है ।
-- इंडिगो बच्चे आमतौर पर पारंपरिक
स्कूलों में निचले ग्रेड
लाते हैं उनके
शिक्षकों के अस्वीकृति के कारण, शिक्षकों से ज्यादा होशियार होने के कारण और पातक-जाल,
भय- या
हेरफेर-आधारित अनुशासन पर प्रतिकृया की कमी के कारण ।
-- वे बहू कार्य multi task और
सूक्ष्म रूप में सोच सकते हैं ।
-- वे चरम में होते हैं--बीच में नहीं । क्रोध होता है क्योंकि वे अंदर गुस्सा व्यक्त नहीं करते ।
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इंडिगो
नीले रंग का एक उच्च कंपन vibratory पहलू है -- इंडिगो सूक्ष्म दुनिया
के लिए प्रविष्टि प्रदान करता है क्योंकि यह
गहरी शून्यता का रंग है, स्वयं में यात्रा करे, प्राचीन
यादें, मौलिक
रहस्य , छठी
इंद्रिय और गहरा अंतर्ज्ञान
।
इंडिगो
सबसे अच्छे दर्द निवारक रंग में से
एक है और सबसे अधिक दिखने वाला रंग है । यह आकाशीय शरीर और आकाशीय साँचा भर देता है। यह पिट्यूटरी ग्रंथि
pituitary gland को मजबूत बनाता है । यह कसैला और शुद्ध है । इंडिगो मानसिक जागरूकता
और अटकल की स्पष्टता बढ़ाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है ।
अगर तू अपने शरीर को इंडिगो रंग से धक ले तो
कोई भी मच्छर मक्खी तेरे पास नहीं आएगी ।
मानसिक
क्षमताएं आकषिए रिकॉर्ड्स Akashic records को पड़ने की असली है, और
वास्तव में इस दुनिया में आजतक कुछ हुआ
आकाश और समय के निर्वात कपड़े
में लिखा है ।
मानव
चेतना जीवन की इस किताब को पढ़ने के लिए सक्षम है ।
वैदिक
ऋषि 12 कतरा डीएनए strand DNA और विशाल आकार गूंजती पीनियल ग्रंथियों
pineal gland इंडिगो
बच्चे थे । वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तट पर 9000 ईसा पूर्व से 4000 ईसा पूर्व तक से फला-फूली, तब जब एक भूकंप के कारण हिमालय पर हिमनदों
के मुंह पर अवरुद्ध हुआ जिससे नदी सूखी ।
CAPT AJIT VADAKAYIL
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