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ग्लोबल
वार्मिंग और ग्रीन हाउस गैस --कैप्टन AJIT VADAKAYIL
ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस गैस --कैप्टन AJIT VADAKAYIL
--- कोई भी
अगर यह सोचता है कि कैप्टेन vadakayil
बेवकूफ बनाने की कोशिश
कर रहा है गायों के पादने के बारे
में बात करके—तो वह
बेवकूफ है |
गोज़
या पाद गैस FART GAS कुछ और नहीं शुद्ध मीथेन METHANE CH4-- जिसमे 1 कार्बन परमाणु या एटम स्निग्ध हाइड्रोकार्बन aliphatic hydrocarbon-- दो
कार्बन परमाणुओं इथेन ethane बनते हैं, और 3 प्रोपेन बनाता है-- C1 से C4, C5 से C9 कार
पेट्रोल, C10 से C18 कार
डीज़ल diesel है--
सुमुद्री जहाजों
को ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन
हाउस प्रभाव के लिए दोषी ठहराया जाता है, सागर में पेट्रोलियम petroluem आदि
के नुकसान की वजह से---
नहीं!
गूगल
खोज GOOGLE SEARCH पर जा और डालो “cows farting belching ” और देखो कितनि
संख्या में तरीके आप इस गैस के इस्तेमाल के और यदि किफायती ढंग से, रसोई घर में इसका इस्तेमाल करें तो आपका
नोबल पुरस्कार कहीं नहीं जाता |
गाय
लॉबी LOBBY या गाये समर्थन वर्ग बहुत
ताकतवर है-- लेकिन वे vadakayil, को चंपू नहीं बना सकते , जिसने खुद के 2 बच्चों को 2 children (गाय
का) दूध नहीं दिया—क्योंकि यह मनुष्य के लिए हानिकारक है | कैल्शियम CALCIUM आसानी से भोजन से प्राप्त किया जा सकता है।
कोई
जानवर किसी दूसरे पशु का दूध नहीं पीता
। सिर्फ तभी जब गाय
स्वेच्छा से दूध बछड़े को
पिलाती है-- दूध का पहला प्रवाह जो ममता द्वारा प्रेरित है बछड़े के लिए --विषाक्त
या जहरीला TOXIC नहीं है।
बॉलीवुड
फिल्में भी ममता
और क्षमता पूरी तरह भरा है, सही है? यहाँ तक की ममता पर संगीत प्रतियोगिता भी चल रही है ।
मशीन से निकाला गया दूध विषैला होता है क्योंकि गाय के मस्तिष्क जहरीले या विषाक्त
रसायन छोड़ते हैं । ( सरल तौर में प्यार
और बलात्कार के बीच अंतर ) । इस विषय क्वांटम ऊर्जा QUANTUM ENERGY है।
यहां
तक कि बछड़े को शिशु अवस्था के बाद से ही लात मार दी जाती है। एक तेजी आती हुई लॉरी या मशीन के सामने सरल और बेगरज या निस्वार्थ गाय हिलती तक नहीं है लेकिन वो अपने बछड़े के लिए हमेशा चिंता
करती है ।
हम
भारतीयों गाय की पूजा यही कारण से करते हैं ।
हाल
ही में मैने सभी भारतीय टीवी चैनलों
को लिखा एनडीटीवी NDTV / टाइम्स नाओ TIMES NOW / सीएनएन-आईबीएन CNN-IBN आदि, की वो क्या बकवास है की मुंबई के नागरिकों
एक घंटे के लिए बिजली बंद
रखे और “बल्ब से बदल कर सीएफएल लगा ली” । ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस
प्रभाव बल्ब की गर्मी से नहीं ---
मीथेन METHANE /
CO2 गैसों आदि के द्वारा होता है ।
दूध
या संतृप्त वसा यानि SATURATED FAT हानिकारक
है । अधिकतम भारतीयों को तीन साल की उम्र के बाद लैक्टोज असहिष्णुता
यानि LACTOSE INTOLERANCE है -- सरल भाषा में दूध से एलर्जि , जब हम बहुत ज्यादा दूध पीते हैं तो कई देर
तक पादते हैं --(दही
हानिकारक नहीं है--यह अनुकूल anaerobic बैक्टीरिया है)|
पेट
की अस्तर कोशिकाओं यानि STOMACH
LINING CELLS 4 दिनों
में 100 प्रतिस्थापित या बदलते हैं। यह मल की बनावट यानि पतला है या
सक्त , में निहित है।
भारतीए जीभ
क्लीनर या नीम का उपयोग इसीलिए करते
हैं क्योंकि हमारे
योगि 6000 साल
पहले जानते थे की हर
8 दिनों में जीभ की कोशिकाएँ बदलती हैं ।
सच्चे
योगियों ने कभी दूध नहीं पिया ।
उपरोक्त
ज्ञान एक जहाज़ चलाने
के लिए आवश्यक नहीं है--बल्कि यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है अपनी
खुद की जैविक उम्र -- और अपने ग्रहके के लिए!
यह
शायद सबसे अधिक महत्वपूर्ण ज्ञानवरदक पोस्ट पढ़ा होगा आपने एक लंबे समय में या भविष्य में पड़ेंगे ।
अपने शुभ चिंतकों के लिए चारों और फेलाएं |







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