Original Link -- http://ajitvadakayil.blogspot.in/2009/08/perfect-black-body-capt-ajit-vadakayil.html
आदर्श कृष्णिका या परफेक्ट ब्लैक बॉडी - कैप्टन AJIT VADAKAYIL
आदर्श कृष्णिका या परफेक्ट ब्लैक बॉडी - कैप्टन AJIT VADAKAYIL द्वारा
भारतीय एक काले रंग का पत्थर अन्तरिक्ष से आया हुआ शिव लिंगम -- पिछले 9000 वर्षों से पूज रहे हैं ।
मक्का MECCA के अंदर ( मुसलमान ) मूल अतः एक काला पत्थर है ।
जेरूसलम JERUSALEM "रॉक डोम" Dome of Rock के
अंदर -- ( ईसाई/ यहूदियों/ मुसलमान ) मूल एक काला पत्थर है ।
काला या कृष्ण एक अच्छा विकिरक या रेडिएटर radiator और एक अच्छा सोखनेवाला absorber रंग है-
-- क्यों ऊपरवाले ने या अच्छे प्रभु ने उष्णकटिबंधीय या tropical इलाकों में जीवित लोगों को काला बनाया-
क्यों अरबीए महिलाओं को काला पहनने के लिए मजबूर किया जाता है ( घर के भीतर छाया में उन्हें रहने के लिए ) और पुरुष सफेद पहनते हैं ( वे उबलती हुई धूप में हर समय बाहर रहते हैं )?
मेरे
जहाजों पर मैं अपने monkey island silver जहाज़ के ऊपरी डेक या पिछले हिस्से में काला रंग करवाता हूँ ।
भारत में चांदी रंग की silver colour कार खरीदना समझ में आता है, क्योंकि अगर तेरी कार काली है तो 2 एसी AC फिट करने की जरूरत है । एक गर्म दिन में तू एक काले रंग की कार पर ऑम्लेट बना सकते
हैं ।
भारतीय महिला 6 सहस्त्राब्दियों millenniums से अपनी आँखें पर काजल या कोःल या LAMP BLACK लगा रही हैं-आकर्षक बनाने के लिए नहीं - लेकिन वैज्ञानिक कारणों के लिए--
काजल अपने पर पड़ने वाली सभी दीप्तिमान ऊर्जा light energy अवशोषित या absorb कर लेता है ।
सभी प्रकाश की ऊर्जा सोंख ली ताति है नकी बाहर फेंक दी जातियो है---
--और इसलिए ( हाँहाँ !!!! ) सतह काले रंग की दिखेगी-- सम्पूर्ण शक्ति को सोंखनेवाला यह आदर्श कृष्णिका।
एक बॉक्स में एक छोटा सा छेद करना अंदर से पूरा चट काला काजल लगा कर, 98% प्रकाश या लाइट कभी बाहर ही नहीं आ पाएगी । यदि बॉक्स अंदर से चांदी रंग में पोलिश होता-जैसे मेरे जहाज़ के डेक में
तो सिर्फ 6% लाइट बाहर ही सोंख पाता और बाकी सारी लाइट फेंक देता ।
काजल लोहे के चैनलों
पर छोटे छोटे जमा काली और घनी राख को ठोक कर ( जैसे चिमनियों में दरारों में राख़ जम जाती है ) , फिर जमा राख को खुरेद कर निकालते हैं ।
एक
फार्मूला वन रेस कार या यहां तक कि एक साधारण तेल ट्रक टायर के वजन के एक
चौथाई वजन ये काला कार्बन होता है , जिससे इलेक्ट्रोस्टेटिक चार्ज electrostatic charge टायर पर ना बने , जिसके कारण टायर का रबड़ चार्ज संचालित करके टायर की गर्मी भगाता है- वरना वो पिघल जाएगा।
ब्लैकबॉडी या कृष्णिका, अपनी सतह पर पड़ती ऊर्जा सोंखती है बिना तरंगो में भेदभाव करे-- और इसीलिए ब्लैक्बौडी कृष्णिका कहलाती है क्योंकि वो लाइट नहीं फेंकती ।
ऐसा
कोई पूर्ण / आदर्श वस्तु अस्तित्व में नहीं इस गृह पर ( भारतीय मंदिरों में शिव लिंगम को छोड़कर ), जबकि कार्बन ब्लाक सब पर 3% ऊर्जा छोड़ कर सोंखता है ।
सिद्धांत
रूप में, एक कृष्णिका एक आदर्श वितरक emitter है, और किसी भी विशिष्ट specific temperature तापमान पर यह अकेले अधिकतम ऊर्जा का वितरण करता है किसी और से ज्यादा ।
एक
वस्तु सफेद लग रहा है, तो सभी या लगभग सभी ऊर्जा विकृत या बाहर फेंकी जा चुकी है ।
संक्षिप्त: एक वस्तु जो सभी अपने पड़ती सभी ऊर्जा को सोंख ले वे एक कृष्णिका या ब्लेक्बोडी है ।
इसीलिए एक सम्पूर्ण कृष्णिका जैसे शिव लिंगम को लगातार पानी की बुंदों में रखा गया है ।
सभी दक्षिण भारतीय
मंदिरों में मूर्तियाँ लघु और काली हैं--जो ऊर्जा का वितरण करती हैं । (उत्तर भारतीय मंदिरों में विशाल सफेद प्रतिमाएँ हैं--एक पवित्र मूर्तियों की गुजर जाना)



No comments:
Post a Comment
आपके comments समीक्षा करने के बाद पोस्ट कर दिये जाएंगे ।